आसमान के नीचे 
 
आसमान के नीचे 
राव ने पड़ा मेरे पीछे 
नही आएगा तो खींचे 
मेरा कान ज़ोर से | 
 
क्या करू आना पड़ा 
लेकिन आप सबको देखा 
मेरा दिल खुश हुआ 
और एक अच्छा शाम मीलगया | 
 
यहितो हम चाहते थे 
एक परिवार, बड़ा परिवार 
हर वक्त पर मुस्कुराते 
सोचते सबका भलाई, हर वार | 
 
हम आए सब जगा से 
लेकिन रेहने वाले है एक भवन पे 
हम सोचते अलग अलग 
पर हमारा मंज़िल तो है एक | 
 
स्वीकार करो हमारा ये कविता 
आनन्द केलिए हम सबका 
सदा सुखमय जीवन लानेका 
हम है एक परिवार, मेगनोलिया परिवार | 
 
 
आपका मित्र 
गिरीश, विजया, हिमाबिंदु 
A044